‘इक ओंकार’ का नारा देने वाले गुरु नानक देव जी को जब पिता ने 20 रु दिए

‘इक ओंकार’ अर्थात ‘ईश्‍वर एक है’ का नारा देने वाले महान गुरु नानक देव जी की जयंती इस साल 12 नवंबर को मनाई जाएगी. सिख धर्म के महान गुरू नानक देव की जयंती को ना सिर्फ सिख धर्म के अनुयायी बल्‍कि पूरे उत्‍तर भारत में हिन्‍दू धर्म लोग भी बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं. गुरु नानक देव की जयंती को प्रकाश उत्सव और गुरु पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस महान पर्व पर आइए गुरु नानक देव द्वारा दिए गए उपदेशों को जानें और इन उपदेशों को अपने जीवन में शामिल करने का प्रयास करें.

1 बचपन से ही गुरु नानक देव की रूचि सांसारिक बातों की बजायआध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में थी. गुरु नानक देव मूर्ति पूजा और बहुदेवोपासना अनावश्यक कहते थे.

2 गुरु नानक देव के विचारों का हिंदू और मुसलमान दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ा.

3 गुरु नानक देव ने ही इक ओंकार का नारा दिया यानी ईश्वर एक है. वह सभी जगह मौजूद है. उन्‍होंने अपने उपदेश में कहा कि इश्‍वर एक है और वही समस्‍त संसार का पिता है. इसलिए हमें सबके साथ प्रेमपूर्वक रहना चाहिए.

4 गुरु नानक देव दूसरों के प्रति बेहद दयालू थे. एक बार जब उनके प‍िता ने उन्‍हें व्‍यापार में लगाया तो उन्‍हें पिता ने 20 रुपये देकर दुकान से खरा सौदा कर लाने को कहा. गुरू नानक ने उन रूपयों से रास्ते में मिले कुछ भूखे लोगों को भोजन करा दिया और आकर पिता से कहा की वे खरा सौदा कर लाए. इसलिए गुरु नानक देव ने सदा लोगों को ये शिक्षा दी कि कभी भी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए बल्कि मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से जरूरतमंदों की भी मदद करनी चाहिए.

5 गुरु नानक देवजी ने जात−पात को समाप्त करने और सभी को समान दृष्टि से देखने की दिशा में कदम उठाते हुए ‘लंगर’ की प्रथा शुरू की थी. लंगर में सब छोटे−बड़े, अमीर−गरीब एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करते हैं. आज भी गुरुद्वारों में उसी लंगर की व्यवस्था चल रही है, जहां हर समय हर किसी को भोजन उपलब्ध होता है. इस में सेवा और भक्ति का भाव मुख्य होता है.

6 गुरु नानक ने अपने अनुयायियों को हमेशा प्रसन्न रहने और ईश्वर से सदा अतीत के गलत कर्मों के लिए क्षमा मांगने का उपदेश दिया.

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