शिव पर जल अर्पण कर प्रकृति बचाने का संदेश देती है कांवड़‍ियों की पूजा

श‍िवरात्रि का त्‍योहार सावन में पावन महीने में मनाया जाता है. इस दिन शिवभक्‍त मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं और शि‍व को जल अर्पित करते हैं.

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि पूजा करते श्रद्धालु.

देशभर में श‍िवरात्रि का त्‍योहार काफी धूमधाम से मनाया जा रहा है. मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है. अलग अलग शहरों से लोग हरिद्वार पहुंच रहे हैं. वहां गंगा के किनारे पूजा अर्चना कर गंगा के पवित्र जल को अपने साथ लाए पात्र में भरकर अपने शहर के लिए निकल रहे हैं. सावन के पूरे महीने चलने वाला यह आयोजन देशभर में आयोजित होता है.

सावन के महीने में लाखों की तादाद में कांवडि़ये अपने गांव मोहल्‍लों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं. इस यात्रा को कांवड़ यात्रा कहा जाता है. सावन की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव का जलाअभिषेक किया जाता है. यह सिर्फ धार्मिक आयोजन भर नहीं है, इसके सामाजिक महत्‍व भी हैं. कांवड के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की आराधना के लिए हैं. पानी आम आदमी के साथ-साथ पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, समेत पूरे पर्यावरण के लिए बेहद आवश्यक है.

सामाजिक महत्व
नदियों से दूर-दराज रहने वाले लोगों को पानी का इकट्ठा करके रखना पड़ता है. हालांकि मानसून काफी हद तक इनकी आवश्यकता की पूर्ति कर देता है फिर भी कई बार मानसून का भी भरोसा नहीं होता है. ऐसे में बारहमासी नदियों का ही आसरा होता है और इसके लिए सदियों से मानव अपने कौशल से नदियों का पूर्ण उपयोग करने की चेष्‍टा करता हुआ कभी बांध तो कभी नहर तो कभी अन्य साधनों से नदियों के पानी को जल विहिन क्षेत्रों में ले जाने की कोशिश करता रहा है. लेकिन आबादी का दबाव और प्रकृति के साथ मानवीय खिलवाड़ की बदौलत जल संकट बड़े रूप में उभर कर सामने आया है.

धार्मिक महत्व
कांवड़ उठाता कांवडि़या धार्मिक संदर्भ में कहें तो इंसान ने अपनी स्वार्थपरक नियति से शिव को रूष्ट किया है. कांवड़ यात्रा का आयोजन काफी अच्‍छी बात है लेकिन शिव को प्रसन्न करने के लिए इन आयोजन में भागीदारी करने वालों को इसकी महत्ता भी समझनी होगी. प्रतीकात्मक तौर पर कांवड़ यात्रा का संदेश इतना भर है कि आप जीवनदायिनी नदियों के लोटे भर जल से जिस भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं वे शिव वास्तव में सृष्टि का ही दूसरा रूप हैं. धार्मिक आस्थाओं के साथ सामाजिक सरोकारों से रची कांवड़ यात्रा वास्तव में जल संचय की अहमियत को उजागर करती है. कांवड़ यात्रा की सार्थकता तभी है जब आप जल बचाकर और नदियों के पानी का उपयोग कर अपने खेत खलिहानों की सिंचाई करें और अपने निवास स्थान पर पशु पक्षियों और पर्यावरण को पानी उपलब्ध कराएं तो प्रकृति की तरह उदार शिव सहज ही प्रसन्न होंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *