कब, कैसे और क्यों भगवान कृष्ण ने किया था कंस वध

ये तो सभी जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने मामा कंस का वध किया था लेकिन क्या आप जानते हैं मथुरा के नरेश कंस का वध कब और कैसे हुआ था. इस साल कंस वध की तिथि 7 नवंबर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के दिन पड़ रही है. चलिए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी.

कैसे हुआ कंस का जन्म

बेशक कंस मथुरा नरेश थे लेकिन वे एक दैत्य की संतान थे. कंस का जन्म मथुरा नगरी में विदर्भ के राजा सत्यकेतु की पुत्री पद्मावती से हुआ था. लेकिन कंस के पिता दैत्य थे. मथुरा नगरी में यदुवंशी राजा उग्रसेन अपनी रानी पद्मावती से बहुत प्रेम करते थे.

एक बार रानी पद्मावती कुछ दिनों के लिए अपने पिता सत्यकेतु के यहां रहने गईं. उस दौरान गोभिल नामक दैत्य की नजर पद्मावती पर पड़ी और वो उन पर मोहित हो गया. पद्मावती को पाने के लिए गोभिल ने राजा उग्रसेन का रूप धर पद्मावती के साथ छल किया और उन्हें अपना बना लिया.

लेकिन कुछ समय बाद ही पद्मावती को अहसास हुआ कि ये राजा उग्रसेन नहीं है लेकिन तब तक पद्मावती गर्भ से थी. पद्मावती ने सारी बात राजा उग्रसेन को बताई, राजा उग्रसेन ने पद्मावती को माफ कर उसे अपना लिया. इसके बाद पद्मावती ने कंस नाम के पुत्र को जन्म दिया. कुछ समय बाद ही पद्मावती ने राजा उग्रसेन की बेटी देवकी को जन्म दिया. कंस और देवकी भाई-बहन में बहुत प्रेम था दोनों एक-दूसरे पर आंच भी नहीं आने देते थे.

कैसे हुआ श्रीकृष्ण का जन्म

देवकी का विवाह महाराज वासुदेव से हुआ. देवकी की विदाई के वक्त ही कंस को भविष्यवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस की मौत का कारण बनेगी. ये सुनकर कंस ने अपनी बहन और वासुदेव को कारगार में डाल दिया. इसके बाद कंस देवकी की हर संतान का वध कर देता. वासुदेव की सातवी संतान बलराम थे जिसे उनकी पहली पत्नी रोहिणी ने जन्म दिया. जब वासुदव की आठवीं संतान यानि श्रीकृष्ण का जन्म होने वाला था तो भंयकर तूफान आया. इस तूफान की मदद से वासुदेव अपने बेटे कृष्ण को अपने दोस्त नंद के यहां पहुंचाने में सफल हो गए. इसके बाद कंस को फिर से आकाशवाणी हुई कि उसका वध करने वाला इस दुनिया में जन्म ले चुका है.

ऐसे हुआ कंस वध

इसके बाद कंस ने सभी नवजातों के वध का आदेश दे दिया. साथ ही कृष्ण का बाल्यवस्था में वध करने के खूब प्रयास किया लेकिन कंस असफल रहा और श्रीकृष्ण की लीलाओं के आगे कंस की एक ना चली. एक दिन कंस ने बलराम और श्रीकृष्ण को मथुरा में आने का निमंत्रण दिया. इस दौरान कंस ने 16 वर्षीय श्रीकृष्ण के लिए कई जाल बिछाए जिससे उनकी मौत हो जाए लेकिन कंस इन सबमें भी असफल रहा.

इसके बाद श्रीकृष्ण ने कंस से युद्ध करते हुए कहा कि मामा कंस तुम्हारे पापों का घड़ा भर चुका है. इसके बाद श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से कंस का धड़ शरीर से अलग कर दिया. जिस दिन पृथ्वी को कंस के आतंक से मुक्ति मिली वो दिन कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन था. इसीलिए हर साल इस दिन को कंस वध के रूप में याद किया जाता है.

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