अन्नकूट उत्सव क्यों मनाया जाता है, जानें इसकी कथा के बारे में

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट उत्सव के नाम से भी जाना जाता है. अन्नकूट उत्सव को देश के कई राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. यूपी, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में अन्नकूट उत्सव को 56 भोग बनाकर मनाया जाता है.

कुछ जगहों पर कढ़ी चावल बनाकर इस त्योहार को मनाते हैं तो उत्तर भारत में मिक्‍स सब्जी जिसे अन्ननकूट कहते हैं, बनाकर इस उत्‍सव को मनाया जाता है. वहीं दक्षिणी भारत में कई जगहों पर राजा बलि की पूजा की जाती है. इस साल अन्नकूट उत्स‍व को 28 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं अन्नकूट उत्सव क्यों मनाया जाता है? चलिए जानते हैं इस उत्साव को मनाने के पीछे का क्या है असल कारण.

अन्नकूट उत्सव की शुरुआत

जैसे की नाम से ही विदित है गोवर्धन यानि गायों की पूजा को ही अन्नकूट उत्सव के नाम से जाना जाता है. अन्नकूट उत्सव यानि गोवर्धन पूजा कार्तिक मास की शुक्ल‍ पक्ष की प्रतिपदा को हर साल मनाया जाता है.

अन्नकूट उत्सव की शुरुआत द्वापर युग से भगवान कृष्ण के अवतार के बाद से हुई. इस दिन गाय और बैल की पूजा की धूप, चंदन और फूल माला से की जाती है. ऐसा माना जाता है अन्नकूट उत्सव पर्व में गाय की पूजा पूरे विधि-विधान और आरती के बाद ही संपन्न होती है. देवी लक्ष्मी को गाय के स्वरूप में पूजा जाता है. अन्नकूट उत्सव पर पूजा करने से सुख-समृद्धि मिलती है और आप स्वास्थ्य रूपी धन मिलता है.

अन्नकूट उत्सव की कथा

गोवर्धन पूजा द्वापर युग से की जा रही है. शुरूआत में ब्रज के इंद्र की पूजा की जाती थी. लेकिन भगवान कृष्ण ने गोकुल वासियों को समझाया कि इंद्र देव सिर्फ अपना काम कर रहे हैं, वर्षा करवाना उनका काम है. हमें इंद्र देव के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि ये हमारे गौधन का संरक्षण और संवर्धन करता है, इससे पर्यावरण शुद्ध होता है. इसी के बाद से गोवर्धन पूजा की जा रही है.

एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने गोकुलवासियों को भयंकर तूफान और बारिश से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था जिसके बाद से गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है. इस उत्सव को ही गोवर्धन पूजा के नाम से जाना जाता है.

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