सांस लेने में होती है तकलीफ ? यह आयुर्वेदिक चूर्ण करेगा चमत्कार

आयुर्वेदिक उपचार में सीतोपालादि चूर्ण का इस्तेमाल सांस की समस्याओं से लेकर सामान्य सर्दी-खांसी, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और तपेदिक के लिए होता है। सीतोपालादि चूर्ण पाचन को बढ़ाता है, भूख में सुधार करता है और मौसमी एलर्जी से लड़ता है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हैं जो मधुमेह, एनीमिया और यहां तक कि माइग्रेन की समस्या में भी मददगार हैं। चलिए जानते हैं इसके कुछ और फायदों के बारे में।

सितोपलादि चूर्ण की सामग्री-

सितोपलादि चूर्ण थोड़ा मीठा और थोड़ा तीखा होता है। ये बेंत की चीनी, भारतीय कांटेदार बाँस, लंबी मिर्च, इलायची और दालचीनी से मिलकर बनता है।

सितोपलादि चूर्ण का उपयोग श्वसन संबंधी समस्याओं, फ्लू और बुखार को रोकने में मदद करता है। आयुर्वेद में ठंड, छाती में जमाव, फ्लू से निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और तपेदिक के लिए सितोपलादि चूर्ण का उपयोग किया जाता है। इसके एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण श्वसन संक्रमण में भी मदद करते हैं।

सितोपलादि चूर्ण का उपयोग आयुर्वेद में एलर्जी के इलाज के लिए भी किया जाता है। इस चूर्ण में एंटीहिस्टामिनिक गतिविधि होती है जो आपको एलर्जी से निपटने में मदद कर सकती है।

पाचन समस्याओं से निपटने के लिए आयुर्वेद में सितोपलादि चूर्ण का बहुत महत्व है। सीतोपालादि चूर्ण को पाचन अग्नि को बढ़ाने, भूख में सुधार करने साथ ही साथ शुद्ध अमा माना जाता है। इसकी कार्मिनेटिव गतिविधि से गैस और सूजन जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।

सितोपलादि चूर्ण में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो मुक्त कणों के हानिकारक प्रभावों से लड़ने में मदद कर सकते हैं। मुक्त कण आपके डीएनए और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये कण उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, मधुमेह, कैंसर और हृदय रोग जैसे रोगों को बढ़ाने में मदद करते हैं।

सितोपलादि चूर्ण एनीमिया, थकान, चिड़चिड़ापन और चक्कर आना जैसी समस्याओं को कम कर सकता है। साथ ही ये आयरन की कमी को दूर करने में मदद करता है।

माइग्रेन एक सामान्य स्वास्थ्य स्थिति है, जो 5 में से 1 महिला और लगभग 15 पुरुषों में से 1 को प्रभावित करती है। आपको जानकर हैरानी होगी सितोपलादि चूर्ण माइग्रेन के दर्द को ठीक करने में भी मदद करता है।

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