दिव्य औषधी है अमृतधारा, है हर मर्ज की है दवा, जानें घर बनाने की विधि

आयुर्वेद में कुछ ऐसी चमत्कारी औषिधियां हैं जिनके बारे में शायद लोग जानते तक नहीं होंगे. आज हम आपका एक ऐसी ही औषधी के बारे में बताने जा रहे हैं. अमृतधारा के बारे में शायद ही आपने सुना है. ये औषधी विक्स जैसे दर्दनिवारक बाम का सबसे बेहतरीन और बिना दुष्प्रभावों वाला विकल्प है. अमृतधारा की खास बात ये है कि इसकी सामग्री को लाकर आप इस दवा को घर में भी बना सकते हैं. चलिए जानते हैं इस गुणकारी औषधी के बारे में.

अमृतधारा का उपयोग

अमृतधारा बदहजमी, हैजा, पेटदर्द, दस्त, उल्टी सिरदर्द और सर्दी-जुकाम का इलाज करने में बहुत कारगर है.

अमृतधारा को पानी या चीनी में मिलाकर भी लिया जा सकता है.

अमृतधारा की सिर्फ कुछ बूंदे ही आपकी तकलीफों को दूर कर सकती हैं.

आमतौर पर हैजा को लाइलाज माना जाता है. एक चम्मच प्याज के रस में 4 बूंद अमृतधारा डालने से हैजा जैसी समस्या से आराम मिलता है.

सिरदर्द के लिए अमृतधारा की दो बूंद माथे पर, दो बूंद कान के पीछे और दो बूंद सिर पर लगाने से सिरदर्द गायब हो जाता है. सिर में लगाने के बाद तेज हवा या पंखे के नीचे ना बैठे.

अमृतधारा को मूंगफली के तेल में मिलाकर छाती पर लगाने से छाती का दर्द चला जाता है. यदि इसकी सुगंध को सूंघ लें तो नाक बहना और छींक की समस्या दूर हो जाती है.

अमृतधारा को 2 चम्मच चीनी में 8 बूंदें डालकर एक डिब्बी में रख सकते हैं और गला खराब होने पर इस चीनी के दो चार दाने खाने से सर्दी-खांसी सब दूर हो जाती है.

कैसे बनाएं अमृतधारा

सामग्री

5-5 ग्राम कपूर सत, अजवाइन और पुदीना सत लें. ये सभी बहुत ठोस वस्तुएं हैं लेकिन जब इन्हें एक साथ मिलाकर एक कांच की शीशी में रखा जाए तो ये सब अपने आप द्रव्य पदार्थ में बदल जाती हैं.

बनाने की विधि

अमृतधारा को कांच की बोतल में ही रखें और हमेशा बंद करके रखें. इसकी सुगंध उड़ने पर ये उतना असरदार नहीं होगी.

एक कांच की बोतल या जार लें. उनमें 5-5 ग्राम कपूर सत, अजवाइन और पुदीना सत मिलाएं और ढक्कन टाइट बंद करके जोर से हिलाएं. धीरे-धीरे ये तीनों कांच के जार में अपने आप घुल कर तरल पदार्थ में बदल जाएंगे.

ध्यान रखें जब भी अमृतधारा का इस्तेमाल करें, उसे पहले अच्छी तरह से हिला दें.

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