हरिद्वार में होगी प्रमुख संतों की धर्म संसद, राम मंदिर नहीं तो क्या होगा मुद्दा ?

हिन्दुओं की घटती जनसंख्या और समाज में प्रचलित जातिवाद की समस्या पर सनातन धर्म के प्रमुख संतों ने चिंता व्यक्त की है. सभी प्रमुख संतों ने इस विषय पर चर्चा करने और इसका हल निकालने के लिए धर्म संसद का आयोजन करने का फैसला किया है.

सनातन धर्म के सभी प्रमुख संतों और संगठनों की ओर से हरिद्वार में 12 जनवरी से दो दिवसीय धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा. इसमें बच्चों में संस्कारों कमी जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी.


अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानंद सरस्वती ने इसकी जानकारी दी. उन्होने बताया कि 12 और 13 जनवरी को अद्भुत मंदिर हरिद्वार में भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज के सानिध्य में धर्म संसद आयोजित होगी.

इसके अलावा कार्यक्रम के सफल संचालन की कामना को लेकर नौ दिवसीय बगलामुखी महायज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा.

अयोध्या राम मंदिर को लेकर हर वर्ष माघ मेला में रणनीति बनती थी
धर्म संसद में समाज में प्रचलित समस्याओं के साथ ही हिन्दुओं की घटती जनसंख्या पर विस्तार से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी.

धर्म संसद से इस बार काशी-मथुरा और गोहत्या पर रोक लगाने का शंखनाद भी करेंगे. अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का मुद्दा उच्चतम न्यायालय सुलझा चुका है, इसलिए धर्म संसद में यह मामला प्रमुख एजेंडे का केंद्र बिंदु नहीं रहेगा.

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