ग्रहों के कारण हो सकती है सांस सबंधी बीमारियां, करें ये योग

बहुत से लोग लंबे समय तक सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित रहते हैं. जबकि कुछ लोग लंबे समय तक श्वसन रोगों का सामना करते हैं. श्वसन रोगों का मुख्य कारण प्रदूषण, ठंडा भोजन और शराब होता है. साथ ही तनाव-चिंता और कम धैर्य के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है.

लेकिन क्या आप जानते हैं ग्रहों की चाल और कमजोर ग्रहों के कारण भी श्वसन संबंधी रोग होते हैं. आज हम आपको बता रहे हैं वो कौन सा ग्रह है जिसके कमजोर होने से सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. साथ ही जानिए, सांस संबंधी बीमारियों के लिए कौन या योग फायदेमंद है.

श्वास विकारों का जिम्मेदार ग्रह

आमतौर पर मंगल ग्रह को श्वसन संबंधी बीमारियों से जोड़कर देखा गया है. जब किसी जातक का मंगल बहुत कमजोर होता है तो उसे लंबे समय तक श्व़सन संबंधी बीमारियों यानि श्वास विकारों का सामना करना पड़ता है. हालांकि, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि के नाराज होने पर भी लोग श्वास संबंधी बीमारियों से पीड़ित होते हैं.

श्वास विकारों के लक्षण

श्वास विकार होने पर बार-बार खांसी होती है, सांस लेते समय आवाज आती है, छाती में जकड़न, दमा, खांसी बाहर नहीं निकलना है.

ऐसे में आपको चंद्रमा, मंगल और शनि से संबंधित कुछ उपाय करना चाहिए. साथ ही हम आपको योग से जुड़े कुछ ऐसे अभ्यास बता रहे हैं जिन्हें करके आप श्वास संबंधी बीमारियों से निजात पा सकते हैं.

कपालभाति प्रणायाम

कपालभाति प्रणायाम योग की ही एक क्रिया है. ये श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती है. इसे करने के लिए आप पद्मासन में बैठ जाएं. अपने दाएं हाथ के अंगुठे से नाक का एक छि‍द्र बंद करके दूसरे से सांस लें. कुछ समय रूकने के पश्चानत नाक के दूसरे छिद्र से सांस छोड़ें और पहले छिद्र को बंद कर दें. इसी प्रक्रिया को दूसरी ओर से भी करें. जल्द फायदा मिलेगा.

सर्वांगासन

सांस संबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए सर्वांगासन भी बहुत अहम आसन है. इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं. धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं. इसके बाद कूल्हों को ऊपर उठाते हुए पैरों को अधिक ऊपर उठाएं और हाथ का सहारा लेते हुए कुछ देर इसी आसन में रहें.

शवासन

इसमें व्यक्ति की मुद्रा मृत के समान होती है इसीलिए इसे श्वासन कहते हैं. इस योग को करने से सांस संबंधी बीमारियां दूर करने में बहुत आसानी होती है. इस योग को करने के लिए पीठ के बल आराम से लेट जाएं. हाथ-पैर ढीले कर दें और आराम से सांस लेते हुए शरीर को ढीला छोड़ दें. आंखें बंद करके 15 मिनट तक इसी आसन में लेटे रहें.

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